कंप्यूटर जिस भाषा को ग्रहण कर लेती है वह भाषा उपेक्षा का हुआ शिकार
कंप्यूटर जिस भाषा को ग्रहण कर लेती है वह भाषा उपेक्षा का हुआ शिकार
आरएसएस द्वारा संचालित विद्या मंदिरों में नियमित होती है संस्कृत की पढ़ाई
भारत में जितने तरहों के विद्यालय है सबमें संस्कृत भाषा की पुस्तक है। लेकिन पढ़ाई बहुत कम होती है और छात्र भी इस विषय के तरफ कम ध्यान देते है। जबकि आरएसएस द्वारा जितने विद्यालय संचालित है सभी में बच्चे को बेहतर संस्कृत की शिक्षा प्रदान की जाती है। इन विद्यालय में सिर्फ संस्कृत की पढ़ाई नही होती बल्कि सभी विषयों की पढ़ाई होती है अपितु संस्कृत बच्चे को प्रथम वर्ग से ही पढ़ाया जाता है। वर्तमान समय में जिले के अंदर लगभग एक दर्जन से अधिक संस्कृत विद्यालय है लेकिन जो स्कूल से शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं उस जगह उस स्कूल में शिक्षक की नियुक्ति नही हो रही है। कई वर्षों से मध्यमा आदि परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ है। अब सुशाशन बाबू का फिर से सरकार गठन हुआ है देखना होगा कि इन शिक्षा के तरफ ध्यान देते है अथवा आने वाले समय में संस्कृत शिक्षा का नामोनिशान मिट जाएगा।
राजीब झा - सहरसा

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